एक ब्राह्मण ने कहा है कि ये साल अच्छा है
उसकी बातों पे यकीं करता है, ये दिल भी कैसा बच्चा है
वक़्त की पहली बारिश की चंद थपेड़ो में ही धुल जाएंगे
मैंने जो सपनों की लक़ीरें खींची है, उनका रंग बड़ा कच्चा है
या तारिक़-ए-मुल्क़ बदलने वाला है या शब्दों की परिभाषा
दिल्ली का हर सियासतदान कह रहा है कि वो सच्चा है
साल के पहले ही दिन कुछ पुराने यारो से दुआ-सलाम हो गई
अब तो हम भी ये मान गए कि ये साल अच्छा है
उसकी बातों पे यकीं करता है, ये दिल भी कैसा बच्चा है
वक़्त की पहली बारिश की चंद थपेड़ो में ही धुल जाएंगे
मैंने जो सपनों की लक़ीरें खींची है, उनका रंग बड़ा कच्चा है
या तारिक़-ए-मुल्क़ बदलने वाला है या शब्दों की परिभाषा
दिल्ली का हर सियासतदान कह रहा है कि वो सच्चा है
साल के पहले ही दिन कुछ पुराने यारो से दुआ-सलाम हो गई
अब तो हम भी ये मान गए कि ये साल अच्छा है