Wednesday, October 27, 2010

Mulaakaat....

कहनी थी तुझसे अनकही बातें, सभी पिछले मुलाकातों की ...
बढ़ गयी कुछ और तादाद उन बातों की, तेरी मुलाक़ात के बाद !!!

Chaar panktiyaaN

रंज-ओ-ग़म के बारिश से छुपने की एक जगह रखी है
हमने यारो की छोटी सी महफ़िल सजा रखी है

यादो के आने पे तेरी एक पहरा है पर क्या कीजिये
उस सरगोशी का, जो इस कमबख्त दिल ने जगा रखी है