"क्या आप बाबा को ढूंढ़ रहे हैं ?"
खयालो के सभी धागे अचानक से टूट गए
जो आसमान के जानिब मानो सदियों से देखते हुए सोच रहा था .
चौंक कर पीछे देखा
बेटा पीछे खडा था ; सहमा हुआ
ऐसा लगता था कि ना जाने कब से पूछना चाहता था ये मुझसे
पर एक झिझक कि दीवार तोड़ नहीं पा रहा था
पर शायद उत्सुकता ने भय पे विजय पा ली थी
साहस कर के फिर से उसने
वही प्रश्न दोहराया .
"क्या आप बाबा को ढूंढ़ रहे हैं ?"
मेरे आँखों से झांकते सवालों को देख कर
शायद मेरी मदद करने की कोशिश करते हुए ; उसने कहा
"लोग मर कर तारे बन जाते हैं न !"
उसकी ये बात सुनकर छलकते आँखों पे भी हंसी तैर गयी
जैसे शब् -ए -चाँदनी में झील में चाँद दिखता हो
मुस्कुरा कर सर हिलाते हुए उसके दोनों सवालों का जवाब दे दिया,
बिना एक शब्द कहे हुए
वो अब भी सहमा हुआ था ,
पर शायद मेरी हसी कायम रखने के लिए ही
फिर से सवाल किया उसने
"इनमे से कौन सा तारा बाबा हैं ?"
फिर से एक मौत सी ठंडी हकीक़त का टुकड़ा
गले में आ के फंस गया
बेटे की तरफ पीठ कर के , आसमान की ओर देखते हुए सोचने लगा :
मैं भी वही ढूंढ़ रहा हु बेटा
इंतज़ार में हु कि जब कोई तारा मुझसे नज़रे मिलाएगा
और मुस्कुरा देगा मेरी जानिब देख के
एक आँख मार कर के बोलेगा -
क्यूँ बच्चू , अब कैसा लग रहा है वह़ा ,
मेरे बिना ...
पहचान लूँगा मैं उन्हें तब ...
मेरी कशमकश देख कर , उसने खुद ही एक तारा चुन लिया
सबसे ज्यादा चमकता हुआ एक तारा
और कहा : "ये रहे मेरे बाबा "
और मैं अब भी खयालो के जंगलो में भटकता सोच रहा हु
बाबा , तुम तो मेरे सूरज थे ...
हमेशा सही रास्ता दिखलाते हुए
सफ़र पार करने के लिए रौशनी का अलाव हाथ पे रख देते थे
अंधेरो का साया भी नहीं पड़ने दिया कभी
अब कैसे समझाऊं खुद को
कि वो आफताब जो कल तक मेरे माथे पे जगमगाता था
आज एक तारा बन के दूर से ही मुस्कुरा रहा है
उसी वक़्त एक आवाज़ आई ..
उस तारे ने Telepathy से मुझसे बात करी हो जैसे
"क्यों परेशान हो ..
सूरज भी तो एक तारा ही है
फर्क तो बस फासलों का ही है सूरज और तारे में ...
वो भी जब दिल के unit में नापो ,
तो शायद बहुत कम ही निकले !!!"
Waah...
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